Sunday, February 27, 2011

भारत के लिए विश्व कप २०११

        भारत के लिए विश्व कप २०११ कैसा रहेगा ये तो वक़्त ही बताएगा . क्या भारत १९८३ विश्व कप की शानदार जीत को दुहरा पायेगा या इस बार भी देशवाशियों को निराश ही होना पड़ेगा अभी तक का भारत का खेल तो सराहनीय ही रहा है लेकिन सिर्फ रन बना लेने भर से ही मैच नहीं जीता जा सकता बल्कि मैच जीतने के लिए गेंदबाज़ी  और क्षेत्ररक्षण  को भी मजबूत करना होगा. एक तरफ भारतीय टीम में दुनिया के महानतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर समेत कई दिग्गज  बल्लेबाज है वही टीम में अछे गेंदबाजों की  कमी का एहसास  साफ तौर पर देखने को मिल रहा है . भारतीय  क्रिकेट टीम के साथ पुरे देश की उमीदे जुडी है और इनके जीत के लिए लोग भगवन से दुआएं भी कर रहे है लेकिन देखना ये है की टीम लोगो की उम्मीदों  पर किस हद तक खरी उतरती है .


                                                               अभिषेक सिंह
                                                                  गाजीपुर

Tuesday, February 22, 2011

वाह-वाह ये है मायावती की माया ..

               जी हा इसे मायावती जी की माया ही कहेंगे की उनके गाजीपुर आने की खबर भर से ही रातो-रात गाजीपुर चमचमाने लगा जो अधिकारी पैसा ना होने का रोना रोते थे वो आज जोरो से काम करवा रहे है और करवाएं भी क्यों ना मुख्यमंत्री जो आने वाली है . लेकिन सवाल ये उठता है की क्या मायावती जी को ये नहीं दिखेगा की जो सड़के, बनी है वो कब की बनी है जो विकास  कार्य हुआ है वो कितने दिन का है, और कहा से आया इतना पैसा, अगर विकास करना ही था तो पहले क्यों नहीं किया गया ? आम जनता को क्या मिलेगा इस दौरे से चार दिन के लिए चमचमाती मानक के अनुरूप ना बनने वाली सड़क जो एक ही बारिस के बाद ख़राब हो जाएगी और फिर शुरू होगी वही बदहाली जो पहले से चली आ रही है . कभी इसके बारे में सोचा है हमारे प्रदेश की मुखिया ने , एक बार जिला अस्पताल चले जाना एक बच्चे को गोद में उठा लेना कुछ नसीहत  देना और भूल जाना क्या इस से हो जायेगा प्रदेश का विकास ? हमें विकास चाहिए सिर्फ और सिर्फ विकास हमें दिखावा नहीं चाहिए, हमें चार दिन की सड़क नहीं चाहिए बल्कि ऐसी सड़क चाहिए जो हमेसा सड़क जैसी दिखे जर्जर नहीं , हमें ऐसी बिजली की जरुरत है जो हमेशा रहे बल्कि ऐसे चोचले पन की नहीं जो कुछ दिन बाद शहर  को फिर से अँधेरे में डूबा दे .
ये सारी तैयारियां उनके लिए हो रही है जिनको हमारे प्रदेश की गरीब जनता ने वोट दे कर मुख्यमंत्री बनाया है लेकिन ऐसा उस गरीब जनता के लिए क्यों नहीं किया जाता..

 ऐसा तो प्रदेश की मुखिया को समझाना चाहिए..

                                                                                                        अभिषेक सिंह
                                                                                                            गाजीपुर

Thursday, February 10, 2011

उत्तर प्रदेश की मुखिया की जूती पर धूल कैसे हो सकता है ?

                जी हाँ दोस्तों इतने बड़े प्रदेश की इतनी बड़ी मुखिया और उनके जूतों पर धूल ? वो भी सुरक्षा में लगे इतने अच्छे अधिकारीयों के रहते हुए कैसे हो सकता है,  धूल की इतनी मजाल  की  वो मुखिया के जूतों पर लग जाये उसे आम आदमी का चेहरा नहीं मिला था जो वो जूतों पर लगने गयी थी ये वाकिया कुछ दिन पहले मायावती जी  के दौरे की है जब डी.एस. पी रंक के एक अधिकारी ने उनके जूतों की धूल सरेआम अपनी रुमाल से साफ़ की थी और विपक्ष तथा मीडिया ने इस मामले को तूल  पकड़ा दिया लेकिन विपक्ष को यह जान लेना चाहिए की डी.एस. पी साहब मुखिया जी की सुरक्षा में लगे थे और धूल से उनकी सुरक्षा को खतरा है ऐसा सरकार के लोगो का कहना था और उनकी हर तरह की सुरक्षा करना साहब का कर्त्तव्य बनता है. लेकिन यहाँ सवाल ये उठता है की क्या धूल सिर्फ उनके जूतों पर लगी होगी जब इतनी धूल जूतों पर लग सकती है तो कुछ तो धूल  उनके चेहरे पर भी लगी रही होगी चेहरे की धूल क्यों नहीं साफ़ की साहब ने क्या उस से उनकी सुरक्षा को खतरा  नहीं था और हाँ एक सवाल और है की जिस उड़न खटोले से प्रदेश की मुखिया उड़ती है  वो भी तो धूल उडाता है. क्या प्रदेश प्रमुख  ने कभी ये सोचा है की वो धूल कहा जाती होगी किसके चेहरे पर, किसके जूते पर लगती होगी कौन करता होगा उन्हें साफ़ ? जिस प्रदेश की जनता ने उन्हें वोते दे कर प्रदेश की मुखिया बनाया कभी सोचा है उन्होंने की वे मजदूर जो दिन-रात उसी धूल में कम करते है तब जा कर कहीं उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब होती है उनकी धूल कौन साफ़ करता होगा ? वो दलितों की नेता बनती है शोषितों के नेता बनती है लेकिन उन दलितों को उनसे सवाल करना चाहिए की जो पैसा उनके विकास में लगना चाहिए था वो उन्होंने अपनी मूर्ति और हाथी में लगा दिया इससे क्या मिला उन लोगो को जिनका वो पैसा था सिर्फ और सिर्फ धूल ? उनके जूतों पर लगी धूल तो उनकी सुरक्षा में लगे अधिकारी साफ़ कर ही देंगे  क्यों की उनके पास और कोई काम जो नहीं है जनता के काम से उन्हें मतलब नहीं है  जनता  को तो डी.एस. पी साहब जैसे अधिकारी अपने रौब से डरा धमका कर और अपना क्राइम का ग्राफ कम करने के लिए फर्जी  मुकदमो में फसा देते है. लेकिन साहब करे भी तो क्या करें प्रदेश की मुखिया का जो सवाल है और प्रमोसन भी तो चाहिए.
                      लगे रहिये साहब ऐसे ही कम से आप का और देश का और आप के डिपार्टमेंट का नाम बढेगा.


                                                                                                                                        अभिषेक सिंह
                                                                                                                                          गाजीपुर