भारत का ६२ वाँ गणतंत्र दिवस और इस पावन पर्व पर भी देश की शान तिरंगे झंडे पर राजनैतिक दलों की सियासत, क्या जनता का ये हक़ नहीं बनता की वो सरकार से पूछ सके की क्यों की जा रही है ये सियासत, कैसे चलेगा ये देश, क्या हमारे देश के नेता उन वीरो की क़ुरबानी भूल गए जिन्होंने इस देश की शान इस तिरंगे की शान में अपने जान की बाज़ी लगा दी और अपनी जान दे कर भी तिरंगे की शान बचाई थी. श्रीनगर के लाल चौक पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को उम्र अब्दुल्ला सरकार और हमारे देश की कांग्रेस सरकार ने झंडा न फहराने दे कर देश की शान पर बट्टा लगाने का काम किया है. अगर कांग्रेस ये कहती है की भाजपा श्रीनगर के लालचौक पर झंडा फरहाने के मामले को टूल दे रही है तो क्या कांग्रेस का ये फर्ज नहीं बनता की वो ही लाल चौक पर झंडा लहरा दे . कांग्रेस और उम्र अब्दुल्ला सरकार तो अब कश्मीर का भारत का हिस्सा मानते ही नहीं है और हमारी इसी सोच का नतीजा है की हमारे पडोसी मुल्क लगातार हमारे खिलाफ षड़यंत्र किये जा रहे है और हमारी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है सरकार को ये जवाब देना होगा की आखिर क्यों किया जा रहा है ऐसा क्या वो लाल चौक पर पकस्तानी झंडा लहराना देझ्ना चाहते है या अपने देश को एक बार उन शहीदों की क़ुरबानी को धुल में मिला कर देश को गुलाम बनाना चाहते है. इसका जवाब देना होगा सरकार को .........
अभिषेक सिंह
गाजीपुर


