भारत के लिए य़ू पी ए का आम बजट
जी हा दोस्तों इस बजट को आप भारत का नहीं बल्कि य़ू पी ए सरकार का ही आम बजट कहें तो बढ़िया होगा. क्यों की बजट में जो लोकलुभावन बातें कही गयी है उसमे से कम ही है जो पूरी होने वाली है. भारत की बीमार और गरीब जनता पर हमारे वित्त मंत्री ने एक उपहार और भी दे दिया है जिससे की अब उनका इलाज भी महंगा हो गया है बीमारी की जाँच भी महेंगी हो जाएगी, हमारे देश के बच्चो पर भी वो मेहरबान हुए है उनके भी कापी- किताब और स्टेशनरी को थोडा महँगा कर दिया है क्यों की आमिरों के बच्चो को तो इससे फर्क ही नहीं पड़ेगा और गरीबो के बच्चे पढेंगे नहीं क्यों की सरकार ये जानती है की गरीबों के बच्चे अगर शिक्षित हो जायेंगे तो सरकार की सारी नीतियों को समझने लगेंगे और उन्हें फिर वोट नहीं देंगे. वाह प्रणव दा क्या सोच के तीर मारा है आप ने महंगाई रोकने का कोई उपाय ही नहीं है इनके बजट में क्यों की कांग्रेस सरकार के हिसाब से देश में महंगाई है ही कहा जो रोकनी पड़े, नौ प्रतिशत का विकाश दर ले कर चले है हमारे नेता जी और वो पूरी कैसे होगी जनता के पैसे से गरीब जनता के पास खाने को पैसे नहीं है वर्ष २०१० अबतक का सबसे भ्रष्टतम वर्ष रहा है और अभी घोटालों की पोल खुलती जा रही है वाकई काबिले तारीफ है सरकार को तो शाबासी मिलनी चाहिए और मिल ही रही है देश के प्रधानमंत्री से जो बेईमान दल के ईमानदार नेता है उनकी मौन सहमति प्राप्त है घोटाले बाजो को, अनाज भण्डारण सुद्रिन करने की बात महज बेमानी लग रही है कहा तो ये पहले से जा रहा है लकिन किया क्या जा रहा है जिससे अनाज का उचित भण्डारण हो सके. क्यों प्रणव दा क्यों देश की जनता को मुर्ख बना रहे है आप के इस बजट में उन सारे लोगो के लिए तो सब कुछ है जिनके पास पहले से सब कुछ है लेकिन उनके लिए क्या है जिनके पास पहले से कुछ नहीं है. खेती किसानी पर भी थोडा रहम किया है मंत्री जी ने किसानो को चार प्रतिशत पर कर्ज उपलब्ध होगा लेकिन ये नहीं कहा की उस कर्ज के लिए किसान को बैंक मैनेजर के पास कितनी बार जाना होगा और कितना कमीशन मांगेगा.
कोई बात नहीं इस बजट में न सही अगले बजट में कुछ कर देना हम तो ऐसे ही है .
अभिषेक सिंह
गाजीपुर

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