नमस्कार दोस्तों आप सभी को मकरसंक्रांति की ढेर सारी शुभकामनायें .
बहुत दिनों बाद आज कुछ लिखने की ललक जगी है दिल में, व्यस्तता की वजह से अपने विचार आप लोगों से शेयर नहीं कर पा रहा था। आज फुर्सत मिली सो अपने दिल की बात ब्लॉग के माध्यम से कहने की जिज्ञासा ने आज फिर से कंप्यूटर के पास बैठने को प्रेरित किया है।
इन्सान की ज़िन्दगी में कभी न कभी कुछ न कुछ एसे पल आते ही हैं जब उसे थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन कठिनाइयो से इन्सान को जो शीख मिलती है वो जीवन के लिए बहुत उपयोगी होती है। वर्ष 2012 में मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ की ज़िन्दगी के इस कठिन दौर ने मुझे जो भी शिखाया जो महसूस कराया उसके दम पर आज मेरे अन्दर जो आत्मविश्वाश जगा है शायद ज़िन्दगी का मेरे लिए एक अनमोल उपहार है। अगस्त 2012 को अचानक मेरी साढ़े तीन वर्ष से चल रही नौकरी का चले जाना और मन में विचारों का वो तूफान की अब क्या करें लेकिन ज़िन्दगी के सारे रंगों के बीच भी कहीं न कहीं आप के लिए कुछ बचा जरूर होता है मेरे थोड़े से प्रयास से दो दिनों बाद ही मुझे नयी जगह नौकरी मिल गयी साथ ही साथ सीखने का वो सुनहरा मौका की मुसीबतों के समय भी इंसान को धैर्य नहीं खोना चाहिए क्या जाने आप के लिए कोई नया रास्ता इंतज़ार कर रहा हो आप की मंजिल कहीं और हो। निक ने साथ किया गया मेरा लगभग चार साल का काम और वहां के लोगों का सहयोग आज भी मुझे याद है वो आत्मीयता वो लगाव जो मुझे निक गाजीपुर में मिला खाश कर के विजय सर का स्नेह , प्यार, मुझे समझाना कभी प्यार भरी डांट मुझे दी गयी उनकी सारी सीख जो मुझे अपना करियर आगे बढ़ने के लिए मददगार हो रही है। फिर शुरू होता है सहज के साथ तयं किया गया तीन महीने का सफ़र वो टीम भावना से काम करना एक दुसरे से मजाक, हंसी के वो पल फील्ड से आने के बाद टी स्टाल पर गप्पों की लड़ियाँ काम का वो दबाव जो एक सेल्स एग्जीक्यूटिव की ज़िन्दगी में होता है, के बीच मस्ती के वो भी पल जो पूरी ज़िन्दगी में नहीं भूले जा सकते हैं।लेकिन इस सफ़र को भी मैंने छोड़ दिया और चला आया एक नए और अनोखे सफ़र पर एच . आई . वी/ एड्स जागरूकता का सफ़र जिसमे ली गयी ट्रेनिंग वर्कशॉप और मऊ में दी गयी पांच दिवसी ट्रेनिंग ने मुझे एक ऐसे पटल पर ला कर खड़ा कर दिया जहाँ मुझे अपनी प्रतिभा निखारने के साथ- साथ खुद को शाबित भी करना था की मैं लगभग पचास लोगों को सही से एक अतिसंवेदंसील मुद्दे पर ट्रेनिंग दे पाउँगा की नहीं लेकिन किस्मत ने मेरा साथ दिया और मई अपने आप को शाबित करने में कामयाब रहा। लेकिन फिर शुरू हुआ एक नया सफ़र पानी संस्थान फैजाबाद उत्तर प्रदेश के साथ यूनिसेफ के सपोर्ट से जौनपुर उत्तर प्रदेश में चल रहा बाल आधिकार संरक्षण कार्यक्रम जिस में मैं बर्तमान समय में मछली शहर ब्लाक में ब्लाक कोऑर्डिनेटर की पोस्ट पर कार्य कर रहा हूँ और अपने शिखने शीखाने के दौर को ज़ारी रखा हूँ।
अभिषक सिंह
गाजीपुर

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