आप सभी पाठकों को मेरा नमस्कार
आज बहुत दिन बाद कुछ लिखने का मन हुआ है सोच रहा था क्या लिखू? तभी मन में आया अन्ना हजारे के किये जा रहे सराहनीय प्रयाश का लोकपाल बिधेयक की मांग और भ्रष्टाचार पर उठाई जा रही उनकी आवाज़ जिससे सरकार की किरकिरी हो रही है और सरकार भी खूब है हमारे बेईमान नेतावों के ईमानदार सरदार जी ने कहा की अन्ना को किसी ने बहका दिया है जिससे वो अनशन पर बैठें है.लेकिन सरकार को ये पता होना चाहिए की अन्ना कोई बच्चे नहीं है जो वो किसी के बहकावे में आजायेंगे और अनशन कर देंगे. अन्ना को मिल रहे समर्थन से भी तो सरकार को ये पता होना चाहिए की अब देश सरकार का नहीं जनता का है जनता भी अब समझ गयी है की देश में क्या हो रहा है अब एक नहीं हज़ार अन्ना पैदा होंगे ये अभियान एक क्रांति का रूप लेगा और भारत की तश्वीर बदल देगा क्यों की अब इसी की जरुरत है बिना इस के कुछ भी नहीं हो सकता है इस देश का क्यों की देश के मुखिया को देश में क्या हो रहा है इसका पता होते हुए भी नहीं पता है. बेईमानों की फौज खड़ी कर रखी है सरकार ने महंगाई बढती जा रही है जनता त्रस्त है सरकार मस्त है.महंगाई को सरकार देश के विकास के लिए जरुरी मानती है लकिन कैसा विकास जब देश की जनता भूख से बिलख रही है जनता के पैसे से नौकरशाह ऐश कर रहे है, और आज जब अन्ना जैसा कोई समाज सेवी जनता की आवाज़ उठा रहा है तो सरकार कहती है की उन्हें बहकाया गया है नहीं ऐसा नहीं है. अन्ना ने तो किसी से नहीं कहा की आप मेरे साथ आवो बल्कि जनता को यह खुद लगने लगा है तो जनता उनके अभियान के साथ है और इसतरह के किसी भी अभियान में जनता साथ रहेगी. आज़ादी की जंग जैसी है यह लड़ाई और हम सब है क्रन्तिकारी जो देश को इस गुलामी से आजाद करने का संकल्प लेते है क्यों की बिना जनता के सहयोग के ऐसा कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता और इस अभियान का सफल होना जरुरी है अन्ना हजारे जैसा बुज़ुर्ग फौजी जब देश के लिए इतना कुछ कर सकते है तो हम युवा क्यों नहीं?हमें अपने आसपास समाज में होने वाले भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी,रिश्वत के खिलाफ मिलकर आवाज़ उठानी चाहिए और सिर्फ आवज़ ही नहीं उठानी चाहिए बल्कि इसे रोकने का प्रयाश भी करना चाहिए.
अभिषेक सिंह
गाजीपुर

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