Thursday, March 17, 2011

आप सभी लोगो को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं

आप सभी लोगो को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं


                 जी हाँ मित्रों मेरी तरफ से आप सभी को होली मुबारक हो, होली एक ऐसा पर्व है जिस से हमें लोगों से मिलने मिलाने का मौका मिलता है, होली रंगो का त्यौहार है और इन रंगों से हमें बहुत कुछ  सीखने  को मिलता है जिस तरह कई रंग मिल कर एक नए रंग का रूप ले लेते है. उसी   तरह हमें भी अपने जीवन में लोगो से हिल मिल कर रहना चाहिए न की बैर दुश्मनी से.  ये रंग की छोटी सी पुडिया हमें रंगीन कर जाती है हमें इतनी बड़ी सीख  दे जाती है और हम है की इन्सान हो कर भी अपना प्रभाव लोगो पर नहीं  छोड़  पाते है.  हमें भी कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हमारे समाज में खुशहाली हो, अमन हो, न की कलह हो. होली हमें साफ  सुथरा रहने की सीख  देती है.  क्या सिर्फ तन या कपडे साफ कर लेने से ही सब कुछ साफ हो जाता है ? नहीं . ऐसा नहीं है हमें तन और कपड़ो के साथ अपने व्यक्तित्व को  भी साफ रखना होगा  ..

              आज कल तो होली का मतलब ही बदल गया है या यूँ  कह लिया जाये की बदल दिया गया है होली पवित्रता और उल्लास, विजय का पर्व होता है लेकिन आज तो होली के दिन मदिरा पान करना आम चलन हो गया है. और दिनों से ज्यादा लोग इस दिन शराब  पीते है शराब  की दुकानों पर भीड़ जुटी होती है पीने वालों की, और फिर होता क्या है दारू के नशे  में लोगो से झगड़ा करते है. कहा तक सही है ये सब क्या इस पबित्र पर्व पर नशा  जरुरी है या ये सिर्फ पीने वालों की शरारत  होती है..
 
     हमें इस वर्ष होली पर यह संकल्प लेना चाहिए की हमें समाज से इन बुराइयों को मिटाना है एक सुन्दर और स्वच्छ समाज बनाना है न की नसे का समाज .

           एक बार फिर आप सभी लोगों को होली की शुभकामनायें .

                                                                  अभिषेक सिंह
                                                                    गाजीपुर

               

Tuesday, March 1, 2011

भारत के लिए य़ू पी ए का आम बजट

भारत के लिए य़ू पी ए  का आम बजट

          जी हा दोस्तों इस बजट को आप भारत का नहीं बल्कि य़ू पी ए सरकार का ही आम बजट कहें तो बढ़िया होगा. क्यों की बजट में जो लोकलुभावन बातें कही गयी है  उसमे से कम ही है जो पूरी होने वाली है. भारत की बीमार और  गरीब जनता पर हमारे वित्त  मंत्री ने एक उपहार और भी दे दिया है जिससे की अब उनका इलाज भी महंगा  हो गया है  बीमारी की जाँच भी महेंगी हो जाएगी, हमारे देश के बच्चो  पर भी वो मेहरबान हुए है उनके भी कापी- किताब और स्टेशनरी को थोडा महँगा कर दिया है क्यों की आमिरों के बच्चो  को तो इससे फर्क ही नहीं पड़ेगा और गरीबो के बच्चे पढेंगे नहीं क्यों की सरकार ये  जानती है की गरीबों के बच्चे अगर शिक्षित हो जायेंगे तो सरकार की सारी नीतियों को समझने लगेंगे और उन्हें फिर वोट  नहीं देंगे. वाह  प्रणव दा क्या सोच के तीर मारा है आप ने महंगाई रोकने का कोई उपाय ही नहीं है इनके बजट में क्यों की कांग्रेस  सरकार के हिसाब से देश में महंगाई है ही कहा जो रोकनी पड़े, नौ प्रतिशत का विकाश दर ले कर चले है हमारे नेता जी और वो पूरी कैसे होगी जनता के पैसे से गरीब जनता के पास खाने को पैसे नहीं है वर्ष २०१० अबतक का सबसे भ्रष्टतम वर्ष  रहा है और अभी घोटालों की पोल खुलती जा रही है वाकई काबिले तारीफ है सरकार को तो शाबासी  मिलनी चाहिए और मिल ही रही है देश के प्रधानमंत्री से जो बेईमान दल के ईमानदार नेता है उनकी मौन सहमति प्राप्त  है घोटाले बाजो को, अनाज भण्डारण सुद्रिन करने की बात महज बेमानी लग रही है कहा तो ये पहले से जा रहा है लकिन किया क्या जा रहा है जिससे अनाज का उचित भण्डारण हो सके. क्यों प्रणव दा क्यों देश की जनता को मुर्ख बना रहे है आप के इस बजट में उन सारे  लोगो के लिए तो सब कुछ है जिनके पास पहले से सब कुछ है लेकिन उनके लिए क्या है जिनके पास पहले से कुछ नहीं है. खेती किसानी पर भी थोडा रहम  किया है मंत्री जी ने किसानो को चार प्रतिशत पर कर्ज उपलब्ध होगा लेकिन ये नहीं कहा की उस कर्ज के लिए किसान को बैंक मैनेजर  के पास कितनी बार जाना होगा और कितना कमीशन  मांगेगा.

             कोई बात नहीं इस बजट में न सही अगले बजट में कुछ कर देना हम तो ऐसे ही है .

                                                                                                अभिषेक सिंह
                                                                                                 गाजीपुर