Wednesday, March 21, 2012

राजनीति और जातिवाद

आप सभी पाठकों को मेरा प्रणाम ,

           राजनीति में जातिवाद आज के चुनावी माहौल का एक महत्वपूर्ण अंग  बन गया है, और हो भी क्यों न हमारे इतने अच्छे राजनेता जो है, अपने लाभ के लिए देश की भोली-भाली जनता को ऐसे बहका देते है जैसे कोई पथिक अपना रास्ता भूल जाता है, और जनता का भी क्या है, अपने तत्काल भावना को रोक नहीं पाती और बह जाती है उसी धारा में जिस धारा में हमारे राजनेता ले जाना चाहते है, इस रास्ते पर चल कर लाभ तो सिर्फ नेतावों को मिलता है, और जनता को कुछ नहीं हाँ,  इतना जरुर मिलता है कि हो सके किसी जाति की संख्या ज्यादा हो तो उस जाति का कोई बिधायक सा सांसद हो जाये लकिन वो नेता जी सत्ता में आने के बाद करते क्या है ? क्या इसका हिसाब हमने कभी लिया है उनसे ? नहीं, पांच सालों बाद कोई फिर से आता है जाति और धर्म के नाम पर हमसे वोट मांगता है और फिर उसके दर्शन नहीं होते है. क्यों नहीं समझते हम कि देश का विकास जाति, धर्म, संप्रदाय, से नहीं सही सोच से होता है सही काम करने से होता है. और राजनितिक दल तो  सारी सीमायें ही पार कर गये है. जाति और धर्मं के आधार पर एक दुसरे को भड़काया क्यों करते ऐसा सिर्फ सत्ता में रहने के लिए. लेकिन क्या करते हैं कुर्सी पाकर भी देश की जनता के लिए करते क्या है? आपस में बयान बाज़ी, आरोप-प्रत्यारोप, घोटाले,भ्रष्टाचार,अत्यधिक संपत्ति बनाना यही तो करते है. और हम कभी पूछते भी नहीं की देश की जनता का पैसा कहाँ और कब खर्च किया जा रहा है.एक बुजुर्ग  ने देश में ऐसी लहर पैदा की थी  भ्रष्टाचार के खिलाफ लेकिन क्या किया हमने कुछ नहीं भूल गये उस आन्दोलन को और फिर से वही काम जाति, धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर लड़ना झगड़ना, अपने पन की कमी ही हमें इस राश्ते पर ले आयी है जहाँ ये नेता हमें गुमराह के अपने लाभ के लिए हमारा इस्तेमाल करते है और फिर छोड़ देते है हमें हमारे हाल पर और हम भी भूल जातें है वो उनकी गलतियों को और फिर वही इतिहास दुहराया जाता है हम वही के वही खड़े रह जातें है या यूँ कह लीजिये थोड़ी चलने की कोशिश के बाद बैठ जातें है. हम एक होना ही नहीं चाहते. अगर हमें अच्छे डॉक्टर कि जरुरत हो तब हम जाति नहीं पूछते, अच्छे वकील कि जरुरत हो तो हम जाति नहीं पूछते तो फिर अच्छे नेता कि बात हो तो हम जाति क्यों पूछते है विकास क्यों नहीं  पूछते. दोस्तों मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप निकलिए इस जाति-पात के बंधन से और देश के विकास के बारे में सोचिये, ये नेता हमे अपने लाभ के लिए बाँटना चाहते है हमारा विकास नहीं चाहते है.


                                                                                                         अभिषेक सिंह
                                                                                                           गाजीपुर